HP Shiva Project: अमेरिकन डाई फ्रूट पेकान नट सुधारेगा किसानों की आर्थिकी, बढ़ेर में विकसित होगा क्लस्टर

शिवा प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के निचले जिलों में अखरोट के विकल्प के रूप में यह फल बागवानों की आर्थिकी को मजबूत करेगा। अखरोट की खेती हिमाचल के ऊपरी इलाकों में होती है लेकिन, यह भी बड़े स्तर पर विकसित नहीं हो सकी है।
यह हैं औषधीय गुण
इस फल की खास बात यह है कि यह अखरोट की तरह दिखता तो है लेकिन उतना सख्त नहीं होता है। पेकान नट एंटी-ऑक्सीडेंट, प्रोटीन, फाइबर से भरपूर है। यह विटामिन ई का बेहतर सोर्स है। उम्र बढ़ने के साथ होने वाले धब्बों, मोतियाबिंद, टाइप 2 शुगर और फैटी लीवर से संबंधित बीमारियों में इसका सेवन लाभपद्र है। शुगर का स्तर संतुलित बनाए रखने में इसका सेवन फायदेमंद है। वजन कम करने में यह नियंत्रित रूप से सेवन करने पर लाभकारी है। इस फल में मैगनीज भरपूर मात्रा में होता है जिससे हड्डियों के विकास, पाचन तंत्र और प्रतिरक्षा तंत्र को यह मजबूत बनाता है। हालांकि इसके अत्यधिक इस्तेमाल से कुछ लोगों में एलर्जी व उल्टी संबंधी शिकायत भी हो सकती है।
यहां पर तैयार हो रही पौध, ये है वैरायटी
प्रथम चरण में हिमाचल में वाईएस परमार यूनिवर्सिटी नौणी, उद्यान विभाग पालमपुर व कांगड़ा जिले की एक निजी नर्सरी में पेकान नट की पौध तैयार की जा रही है। शिवा प्रोजेक्ट के द्वितीय चरण के तहत प्रदेश में फरवरी माह प्लांटेशन का कार्य शुरू होगा हालांकि पेकान नट की प्लांटेशन के लिए अभी कुछ और माह का इंतजार करना होगा। चौथे व पांचवें साल में पेकान नट के पौधे फल देना शुरू कर देंगे जबकि छह से सात साल का पौधा बेहतर पैदावार देना शुरू कर देगा।
महान और बरकट किस्म की पौध तैयार
शिवा प्रोजेक्ट निदेशक प्रदीप ठाकुर ने कहा कि प्रथम चरण में पेकान नट की महान व बरकट किस्म की प्लांटेशन होगी। विदेशों से भी नई उन्नत किस्मों का आयात किया जाएगा। विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस पर कार्य किया जा रहा है। प्रथम चरण में कांगड़ा और इसके बाद मंडी, सिरमौर व अन्य क्षेत्रों में इसके क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।